कर्म पूजा बने, कर्म भक्ति बने, कर्म सेवा बने-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

-पेड़ लगाये पर्व मनायें
-स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने श्री रामकथा की पूर्णाहुति में किया सहभाग
-कथा व्यास संत मुरलीधर महाराज की श्री रामकथा में पधारे स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज
-श्री रामकथा के यजमान ने गाय और बछड़ा का मनोरम प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज का किया दिव्य स्वागत
-जिस कार्य में अपनी आत्मा का पतन हो वही पाप है
-कथाकार, कथा यजमान और श्रोताआंे को गायों का संरक्षण, पर्यावरण एवं जल संरक्षण का कराया संकल्प
-गंगा तट ऋषिकेश और कुम्भ मेला प्रयाग में किया आमंत्रित
-कथा की पूर्णाहुति पर सभी पूज्य संतों ने पौधे लगाकर वृक्षारोपण का दिया संदेश
ऋषिकेश।
वीरों और शूरों की धरती जोधपुर, राजस्थान में आयोजित श्री रामकथा के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, प्रसिद्ध भगवत कथाकार व नरसिंह नानी बाई का मायरा के संत राधा कृष्ण महाराज, रामस्नेही सम्प्रदाय पीठ के पीठाधीश्वर मंहत रामप्रसाद महाराज, गुजरात भारत साधू समाज के संत घनश्यामदास महाराज एवं कई अन्य पूज्य संतांे ने सहभाग कर हरित कथा का संदेश दिया। श्री रामकथा, संत मुरलीधर जी महाराज के मुखारबिन्द से सम्पन्न हो रही है।
पूज्य संतों ने कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया गया।
इस दिव्य श्री राम कथा को गायों के संवर्द्धन एवं संरक्षण के लिये समर्पित किया गया। कथा के माध्यम से गौ वंश की रक्षा का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।
कथा के दिव्य मंच से परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि ’’राजस्थान वीरों एवं शूरों की धरती है, इस धरती ने भारत माता को अनेक लाल दिये है। यहां की माटी ने अनेक ऐतिहासिक और गौरवमयी विरासत छोड़ी है अब समय आ गया है कि हम उस धरती माँ के लिये फिर से एक इतिहास लिखे और अब वह इतिहास होगा पर्यावरण संरक्षण का, धरती को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त करने का। उन्होने कहा कि हम सभी को मिलकर एक बार पुनः शौर्य दिखाना है और इस भारत भूमि को पुनः पंचवटी बनाना है नही ंतो धरती पर पंचवटी नहीं रहेगी बल्कि पंचवटी केवल कथाओं में ही समाहित होकर रह जायेगी।’’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि पेड़ लगाकर पर्वों को मनाया जायें। कथाओं एवं पर्वों को पर्यावरण से जोड़ना ही धरती को प्रदूषण मुक्त रखने का बेहतर विकल्प है। पर्व और कथा के अवसर पर ’पेडे नहीं पेड़ बाटे’। पर्व और उत्सव के अवसर पर, जन्मदिन और विवाह दिवस के अवसर पर उपहार के रूप में पेड़ बांटने और पेड़ लगाने की परम्परा को अपनाना पर्यावरण संरक्षण का बेहतर समाधान हैै।
संत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि ईश्वर को पाने के लिये मन की निर्मलता एवं तन की स्वच्छता आवश्यकता होती है। कथा के श्रवण से ज्ञान, भक्ति और कर्म के साथ पुरूषोत्तम बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होने कहा कि मानस कथा हमें जीवन जीने की शैली सिखाती है; गृहस्थ जीवन का मर्म बताती है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कथा यजमान और श्रोताआंे को गायों का संरक्षण, पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संकल्प कराया तथा सभी को माँ गंगा के तट पर परमार्थ गंगा आरती में सहभाग करने हेतु आमंत्रित किया। स्वामी जी ने कहा कि आगामी वर्ष प्रयाग में आयोजित होने वाले कुम्भ के सहभाग कर उसे हरित कुम्भ के रूप में मनाने हेतु आप सभी सादर आमंत्रित है। कथा में भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने हाथ खड़े कर पर्यावरण एवं गौ संरक्षण का संकल्प किया इस अवसर पर सभी पूज्य संतों ने कहा कि अब कथा की पूणाहुति पौधें लगाकर हो