किन्नर अखाड़े के संतो ने किया गंगा पूजन

अमित शर्मा
हरिद्वार।
कुम्भ मेला 20२1 के लिए सभी तेरह अखाड के साथ— साथ किन्नर अखाड ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। किन्नर अखाड$े की आचार्य महामण्डलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी लगभग 25 किन्नरों का दल लेकर बीती शाम हरिद्वार पहुची। वृहस्पतिवार को उनके नेतृत्व में किन्नर अखाड$े के वरिष्ठ महामण्डलेश्वरों,संतो तथा अनुयायियों ने श्रीगंगा सभा के तत्वाधान में हर की पैड पर कुम्भ मेले की सफलता तथा विश्व को कोरोना से मुक्ति दिलाए जाने की मंगलकामना के साथ मॉं गंगा का पूजन किया तथा दुग्धाभिषेक किया। हर की पैड$ी पहुचने पर गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने पदाधिकारियों के साथ आचार्य महामण्डलेश्वर का स्वागत किया तथा विधिवत गंगा पूजन कराया। इस अवसर पर जूना अखाड$े के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत महेशपुरी भी उपस्थित थे। गंगा पूजन के पश्चात किन्नर अखाड$े के संतो ने दक्षनगरी कनखल में दक्षेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया तथा पूजा अर्चना की। यहा से यह दल सिद्वपीठ मायादेवी पहुचा,जहां मायादेवी तथा नगर कोतवाल श्री आंनद भैरव की पूजा अर्चना की। किन्नर अखाड$े के सदस्यों ने आचार्य महामण्डलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में जूना अखड$े के अन्र्तराष्ट्रीय संरक्षक तथा अखिल भारतीय अखाड$ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज से आर्शीवाद प्राप्त किया तथा कुम्भ मेले की व्यवस्थाआें को लेकर चर्चा की। आचार्य महामण्डलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया किन्नर अखाड$ा गत नासिक व उज्जैन कुम्भ से अखाड$ा परिषद से कुम्भ पर्व पर अखाड$े के रूप में शाही स्नान किए जाने की मांग कर रखा था। लेकिन उन्हें गत 2१६ के प्रयागराज कुम्भ में अखाड$ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज के प्रयासों से सफलता मिली और उनकी पहल पर जूना अखाड$े के साथ शाही ान किए जाने की प्रशासन ने अनुमति प्रदान की। उन्होने कहा सैकड$ो वर्षो से किन्नर समाज सामाजिक उपेक्षा का शिकार था। जिस कारण सनातन धर्मी होने के बावजूद किन्नर दूसरे धर्म सम्प्रदायों को अपनाने के लिए मजबूर थे। लेकिन काफी संघर्ष के बाद किन्नर समाज एक अखाड$े के रूप में सनातन धर्म की मुख्य धारा में शामिल हो गया। साथ उपेक्षित किन्नर समाज की सामाजिक,आर्थिक तथा धार्मिक प्रतिष्ठा की उन्नत्रि के लिए निरन्तर कार्य करता रहेगा। किन्नर अखाड$े का प्रतिनिधिमण्डल मेलाधिकारी व अन्य अधिकारियों से कुम्भ 2२1 में शिविर लगाए जाने हेतू भूमि तथा अन्य सुविधाआें के लिए मिलेगा। तथा उन्हे मांग पत्र सौपेंगा। इस दल में गुजरात,महाराष्ट्र,दिल्ली बंगाल सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल थे।जिनमें भवानी माई,कामिनी माई,पायल माई,पीताम्बरा माई,पुष्पा माता जी,शिवपुरी माता जी,सतना माई,मयूरी माई,शिल्पा माई,पीठाधीश्वर पवित्रा माई,पीठाधीश्वर दामिनी माई,महंत ऋषिकेश नंदगिरि,संरक्षक दुर्गा दास,पंण्डित राजेश शर्मा अमिनाथ कुलकुर्णी आदि मुख्य थे।