पिछले डेढ़ दशक से कब्जा जमाए बैठे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन इस बार खुद नहीं अपनी कुंवरानी के सहारे पार करेंगे अपनी सियासत की विरासत

लक्सर :  खानपुर विधानसभा सीट पर पिछले डेढ़ दशक से कब्जा जमाए बैठे कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन इस बार  भाजपा के टिकट पर खुद नहीं, अपनी पत्नी के सहारे चुनावी नैय्या पार कराकर अपनी सियासत की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते है।
         उत्तराखंड गठन के बाद कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने पहली बार राजनीति के क्षेत्र में कदम रखा था। उत्तराखंड की पहली विधानसभा चुनाव के लिए प्रणव सिंह ने लक्सर सीट पर पहले कांग्रेस फिर भाजपा से टिकट की मांग की, किंतु किसी भी पार्टी ने उन्हे टिकट नही दिया। तब कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लक्सर सीट पर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में आ डटे। 2002 के विधानसभा चुनाव में लक्सर सीट पर कांग्रेस पार्टी से अजमल नवाज खान, भाजपा से चौधरी विजेंद्र सिंह व बसपा से काजी मोहिउद्दीन चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे। उस चुनाव में लक्सर क्षेत्र की जनता ने काजी हराओ अभियान चलाकर कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को निर्दलीय ही चुनाव जिताकर विधानसभा में भेजा था। तब काजी मोहिउद्दीन दूसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद विधानसभा सीटों का पुनः परिसीमन होने के बाद खानपुर विधानसभा सीट लक्सर से अलग हो गई थी।
             2007 में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ। इसमे खानपुर विधानसभा सीट पर कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन को कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में भाजपा से रविंद्र नागर व बसपा से राजेंद्र सिंह चुनाव मैदान में आ डटे। इस बार भी खानपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने कुंवर प्रणव सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें भारी मतों से जिताया। इसके बाद 2012 में प्रणव सिंह चैंपियन ने फिर से कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ा और लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर ली। इस चुनाव में भाजपा से रविंद्र पनियाला व बसपा से कुलबीर सिंह चुनाव लड़ रहे थे। जिसमे चौधरी कुलवीर सिंह को दूसरे स्थान पर रहकर संतोष करना पड़ा था।
              इसी क्रम में कुंवर प्रणव सिंह ने 2016 में पलटी मारते हुए हरीश रावत की सरकार गिराने की नियत से कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा। इस बार भी खानपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन पर भरोसा जताते हुए उन्हे भारी मतों से जिताया। इस चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मोहम्मद मुफ्ती दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे चौधरी यशवीर सिंह को तीसरे स्थान पर ही संतोष करना पड़ा। इसके बाद अपने बड़बोले पन के कारण प्रणव सिंह को भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। काफी दिनो तक निष्कासित चलने पर भारी मानमनोव्वल के बाद भाजपा ने प्रणव सिंह को फिर पार्टी में शामिल कर लिया था। तभी से पार्टी में प्रणव सिंह की खराब छवि को लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रणव सिंह के टिकट कटने का खतरा मंडराने लगा था।
            चार बार के विधायक कुँवर प्रणव सिंह चैंपियन पार्टी में भारी विरोध के चलते 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना टिकट तो नही करा पाए, किंतु अपनी पत्नी रानी देवयानी सिंह का टिकट कराने में कामयाब हो गए। हालांकि भाजपा के सिंबल पर टिकट होने तक प्रणव सिंह चैंपियन के टिकट कटने की चर्चा जोरों पर चलती रही। 20 जनवरी को टिकट फाइनल होने के बाद ही उन्होने राहत की सांस ली। अब कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन खानपुर विधानसभा सीट पर खुद नही तो पत्नी के सहारे ही चुनावी नैय्या पार कराकर अपनी सियासत की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते है।