स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को मय व्याज क्लेम देने के आदेश

हेल्थ इंशोरेंस करते वक्त एजेंटों द्वारा तरह तरह के प्रलोभन दिए जाते है, लेकिन जब क्लेम का वक्त आता है तो कम्पनी मुँह फेर लेती है,उपचार का खर्च न देने पर जिला और राज्य उपभोक्ता फोरम ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपचार का पूरा खर्च सात फीसदी ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही कंपनी को वादी को पांच हजार रुपये अतिरिक्त देने को कहा है।
विष्णुघाट निवासी चित्रा अग्रवाल पत्नी विनोद अग्रवाल ने फरवरी 2013 में अपना स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी में तीन लाख का इंश्योरेंस कराया था। महिला ने फोरम को बताया कि 7जून 2013 में उसे निमोनिया बुखार हो गया। महिला ने अपना उपचार दिल्ली में कंपनी द्वारा चयनित अस्पताल में कराया और कंपनी को इसकी जानकारी भी दे दी। कंपनी का चिकित्सक संबंधित अस्पताल में आया और उसने चित्रा के स्वास्थ्य की जांच की और उसे उपचार कराने की अनुमति दे दी। चित्रा का कहना है कि 14 जून को अस्पताल से उसे छुट्टी दे दी गई। अस्पताल ने लगभग 87 हजार रुपये का बिल हेल्थ स्टार कंपनी के कार्यालय भेजा। कपनी ने महिला को पहले से ही बीमार बताकर उपचार के बिल का भुगतान करने से मना कर दिया। उपभोक्ता चित्रा ने अपनी जेब से अस्पताल का भुगतान दे दिया। चित्रा का कहना है कि इंश्योरेंस करने से पहले कंपनी के चिकित्सक ने स्वस्थ प्रमाण पत्र दिया था। उसी के बाद उसका बीमा कराया गया। स्थानीय एजेंट के कहने पर एक बार चित्रा ने कंपनी को बिल भेजा। दोबारा से कंपनी ने बिलों को वापस लौटा दिया। सितंबर 2014 को जिला उपभोक्ता फोरम ने चित्रा के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। स्टार हेल्थ ने राज्य उपभोक्ता फोरम में फैसले के खिलाफ अपील कर दी। लेकिन राज्य फोरम में भी कंपनी को राहत नहीं मिली। कंपनी को चित्रा के उपचार का बिल ब्याज समेत देने के आदेश दिये गए हैं।