खाने को दाना नही फिर भी दिल का राजा भिक्षुकः


आज जब हम (योगी रजनीश) भोजन बाँटने गए तब आज एक मार्मिक घटना घटी, अधिकतर लोग ऐसे है जो हमसे प्रतिदिन भोजन लेते है, उसी में से ये बाबा भी एक है। ये बाबा भिक्षा मांगकर अपना जीवन व्यापन करता है। औरों की तरह ये बाबा भी हमसे प्रतिदिन भोजन आदि जो भी हम देते है वो सभी लेता है। किन्तु आज जब भोजन के साथ ही इस बाबा को हमने दूध दिया, वो दूध का पैकेट अंतिम था हमारे पास, जैसे ही दूध दिया तभी एक महिला जिसको तीन बच्चे थे वो हमारे पास आई और दूध मांगने लगी, किन्तु हम बेबस थे, दिल में दुःख था, आँखों में थोड़ा सा पानी, इससे पहले हम कुछ सोच पाते या कुछ कर पाते, उस बाबा ने तुरंत अपना दूध का पैकेट उस महिला को दे दिया। जैसे ही उस बाबा ने ये किया हम उस बाबा को देखते रह गए उसके इस बड़े दिल को देखते हुए मन में यही विचार आया की खाने को दाना नहीं, किन्तु दिल का राजा।
योगी रजनीश…✍️