तालिबान वाला अफगानिस्तान

ब्रजेश पांडेय का सुंदर काव्य व्यंग

तालिबान वाला अफगानिस्तान

अशरफ गनी राष्ट्रपति को
उलटे नंगे पैर भागते देखा
बहादुर पठान महिलाओं को
बन्दूक ताने झांकते देखा
ओसामा बिन आश्रित आसमान,
तालिबान वाला अफगानिस्तान

इंसानियत को कुचलते देखा
उड़ते जहाज़ से फिसलते देखा
खून सने लतपथ लाश पर
तालिबानी झंडा फहरते देखा
है ये कैसा पागल फरमान
तालिबान वाला अफगानिस्तान

बीस साल से रहा इतिहास
अमेरिका का अपना परिहास
रूस को पैतरा बदलते देखा
चीन को हाथ मसलते देखा
शरिया वाला शातिर शैतान
ओसामा वाला आतंकिस्तान

हज़ारों आतंकी आकाओं को,
चरखी जेल से खिसकते देखा
कैद मासूम पठान महिलाओं
दो दो दीनार में सिसकते देखा
सीरिया में अनियंत्रित जश्न तो
तो क़तर में मुल्ला प्रसन्न देखा

भारतीय विमान हाइजैकर
काबुल और कंधार देखा,
अनपढ़ ज़ाहिल गवारों को,
राजभवन में आधार देखा
अमेरिका विष दंश तालिबान
अज़हर मसूद का आतंकिस्तान

नासिर, मन्नौवर, ओवैसुद्दीन
मुस्लिम राजनीती में दींन हींन
महबूबा मुफ़्ती को अकड़ते देखा
अनुपम खेर शेर सा लड़ते देखा
खौफ का कराहता कब्रिस्तान
जम्मू कश्मीर वाला पकिस्तान