सीपीयू भंग किये जाने की मांग की

हरिद्वार।
उत्तराखंड राज्य में सीपीयू का गठन आपराधिक गतिविधियों पर विराम व लगाम लगाने के लिए किया गया था। लेकिन जब से इसका गठन हुआ है तबसे आम जनता का मोटरवाईकल एक्ट के नाम पर उत्पीडन व शोषण किये जाने की घटनाओं का अंबार लगा हुआ है। सीपीयू के गठन को अनऔचिय ठहराते हुए सीपीयू को भंग किये जाने की मांग की। सीपीयू के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सामाजिक दूरी के साथ भाजपा नेता संजय चोपड़ा के संयोजन में पुरानी सब्ज़ी मंडी स्थित प्रांगण में वृक्षारोपण कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सरकार से मांग की उत्तराखंड राज्य सीपीयू पुलिस के गठन को जनहित में भंग किये जाने की मांग को दोहराया।कहा कि सीपीयू पुलिस की कार्यशैली मित्र पुलिस की साख पर भी बट्टा लगा रही है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। सीपीयू द्वारा कुमाऊ रेंज में एक युवक के साथ अमान्य घटना को अंजाम दिया गया। इससे कही ना कही सीपीयू की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे है। हरिद्वार के व्यापारी द्वारा हेलमेट, मास्क व सारे कागज़ दिखाने के बावजूद भी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाना निंदनीय है। चोपड़ा ने कहा उत्तराखंड राज्य में आम मित्र पुलिस की छवि को धूमिल करने वाले सीपीयू पुलिस का राज्य में बने रहने का कोई औचित्य नही है, राज्य सरकार को सीपीयू का जबसे गठन हुआ है। तब से लेकर अब तक की कार्यशैली की जांच कराकर जनहित में सीपीयू पुलिस विभाग को भंग किया जाना जनता के लिए न्यायसंगत होगा। व्यापारी नेता संजय बंसल ने कहा उत्तराखंड राज्य में पूर्वती सरकार के कार्यकाल में सीपीयू पुलिस का गठन यह सोचकर किया गया था कि राज्य में कानून व्यवस्था बाखूबी चलती रहेगी। आपराधिक गतिविधियों में भी खौफ बना रहेगा। लेकिन सीपीयू पुलिस की कार्यशैली में हमेशा सीपीयू विवादित रहे है।आपराधिक गतिविधियों में अंकुश लगाने में सीपीयू की कार्यशैली शून्य रही है ऐसे में राज्य सरकार को कोविड-19 के दृष्टिगत एक बड़ा बजट जो कि सीपीयू पर खर्च किया जाता है। उसकी कटौती करते हुए तानाशाही रवैया अपनाने वाले सीपीयू के अधिकारियों को पदमुक्त कर सीपीयू को भंग किया जाना राज्य हित में होगा। सीपीयू की कार्यशैली व आम जनता के उत्पीडन व शोषण के खिलाफ वृक्षारोपण कर विरोध प्रदर्शन , करने वालों में कुलदीीप खन्ना, अखिलेश, राजेश अरोड़ा, राधेश्याम, हंसराज दुआ, दिनेश कुमार, मोहनलाल, काजू बिहारी, राजकुमार, वीरेंद्र रावत, राधेश्याम रतूड़ी आदि शामिल रहे।